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Take sugar or not: increase your awareness (चीनी लें या नहीं : अपनी जागरूकता बढ़ाएं)

- डा.विद्या रामासुब्रमण्यम

(चीफ न्यूट्रिशनिस्ट, क्लाउड नाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स)



हमारे दैनिक जीवन में चीनी ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिसके बारे में हम सभी को जानने की जरूरत है। शरीर में चीनी का सबसे महत्वपूर्ण रूप ग्लूकोज है। हमारे मस्तिष्क को कार्य करने के लिए प्रति दिन लगभग 130 ग्राम चीनी (ग्लूकोज) की आवश्यकता होती है। जो फल, सब्जियों और शहद सहित सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों से मिलता है। स्वास्थ्य कारणों से हममें से बहुत से लोग यह महसूस करते हैं कि चीनी के दानों में बहुत से हानिकारक तत्व हैं, लेकिन चीनी के बिना शरीर का ठीक से काम करना असंभव है। भोजन में चीनी की उपस्थिति हमारे मूल अस्तित्व के लिए ऊर्जा प्रदान करती है। मानव मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाएं, या न्यूरॉन्स बहुत अधिक मात्रा में होते हैं, और यह सबसे अधिक ऊर्जा की मांग करनेवाला अंग है, चीनी से मिलने वाली सभी ऊर्जा का आधा हिस्सा मस्तिष्क की गतिविधियों को प्रभावित करता है।

हालांकि ग्लूकोज का सबसे सरल रूप चीनी ही होता है और चीनी के दो रूप हैं:

1. प्राकृतिक चीनी - स्वाभाविक रूप से कुछ खाद्य पदार्थों में शर्करा होती है जैसे फल, शहद, दूध आदि। यदि इसे कम मात्रा में सेवन किया जाए तो यह मानव शरीर को लाभ पहुंचाती है।

2. दूसरा चीनी है ‘एडेड शूगर’ के रूप में एक उत्पाद, जिसे प्रसंस्करण और तैयारी के बाद बनाया जाता है, जो पूरे मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) हमें पूरे जीवन काल के दौरान कम चीनी उपयोग में लाने की (सख्त हिदायत) सलाह देता है, जिसमें लोगों को अपने खाने में मीठे की मात्रा कुल कैलोरी के दस प्रतिशत से अधिक नहीं रखनी चाहिए और भविष्य में इसे पांच प्रतिशत तक कर देना चाहिए। सामान्य आहार में महिलाओं के लिए 6 चम्मच और पुरुषों के लिए 9 चम्मच एक आदर्श मानक है। यह 2,000 कैलोरी आहार के लिए क्रमशः प्रति दिन 120 से 200 कैलोरी और 30 से 50 ग्राम के बराबर होता है।

चीनी को क्यों माना जाता है खतरनाक?

चीनी को हमेशा खतरनाक माना जाता है, इसका मुख्य कारण इसमें पोषक तत्वों की कमी है। ऊर्जा में योगदान के अलावा, इसके अन्य किसी भी अच्छे प्रभावों का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। विभिन्न स्वास्थ्य मंचों और वैश्विक स्वास्थ्य पोर्टलों / संगठनों का सुझाव है कि अत्यधिक चीनी का सेवन के बाद हमारे शरीर में अन्य अनाजों को पचने में काफी समय लगता है। साधारण चीनी, जैसे कि टेबल शुगर, शहद और सिरप, जल्दी से मेटाबोलाइज़ करते हैं और रक्त शर्करा में बेतरतीब उतार-चढ़ाव उत्पन्न कर देते हैं, जिससे दांत का टूटना, अधिक वजन, मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। खाने का तरीका हमारे आने वाले समय और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और गैर-संचारी रोगों जैसे मधुमेह, स्ट्रोक, हृदय रोगों आदि के जोखिम को बढ़ाता है। लेकिन दैनिक जीवन में विटामिन और खनिज का भरपूर उपयोग एक बोनस का काम करता है।

गर्भावस्था और चीनी का सेवन

यदि आप गर्भावस्था के दौरान एक स्वस्थ आहार योजना का अनुसरण कर रहे हैं, तो आपको परिष्कृत चीनी का उपयोग बहुत ही कम मात्रा में करना चाहिए। यही वजह है कि अक्सर यह सुझाव दिया जाता है कि महिलाएं गर्भावस्था के दौरान बहुत अधिक चीनी से बचें। इस विशेष समय के दौरान यानी स्वस्थ गर्भावस्था के लिए माता और बच्चे के लिए आवश्यक पोषक तत्वों वाले व्यंजनों और भोजन निर्धारित किए जाते हैं। पोषण अनुसंधान में हो रहे प्रयोगों से संतोषजनक प्रमाण मिले हैं कि सामान्य सीमा में चीनी का प्रयोग सामान्य गर्भाधान और परेशानी मुक्त गर्भावस्था के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है। इसलिए, सभी रूपों में कम मात्रा में चीनी का सेवन अन्य सलाह में सबसे महत्वपूर्ण है। ज्यादा मात्रा में चीनी के उपयोग से गर्भावस्था में परेशानी तथा बजन बढ़ने की संभावना रहती है। बहुत अधिक चीनी ग्लूकोज और इंसुलिन के स्तर को बढ़ा सकती है।अतिरिक्त चीनी के उपयोग से गर्भकालीन मधुमेह की परेशानी सकती है। इसके अलावा, फैटी लीवर का भी खतरा हो सकता है।

गर्भकालीन (जेस्टेशनल) मधुमेह के बाद "गर्भावधि उम्र से बड़े" या "गर्भावधि उम्र से छोटे" बच्चे हों, ऐसी परेशानी हो सकती है।गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक मात्रा में चीनी खाने से, आशंका रहती है कि आप मेटबालिक सिंड्रोम और मधुमेह के उच्च जोखिम में अपने बच्चे के जीन की प्रोग्रामिंग कर रहे हैं। अतिरिक्त शर्करा वाले भोजन से प्री-एक्लेमप्सिया का खतरा बढ़ जाता है।सभी खाद्य सामग्रियों को अच्छी तरह से संतुलित मात्रा में तीनी लेने से गर्भावस्था में अनुकूल परिणाम की संभावना रहती है। सावधानी के साथ, चीनी की मात्रा को नियंत्रित करके मधुमेह के एक मजबूत पैतृक इतिहास वाले और गर्भकालीन मधुमेह से परेशान लोग, अपनी समस्या को बहुत हद तक कम कर सकते हैं।

अपनी इस धरती को बेहतर बनाने के लिए यह आवश्यक है कि हम चीनी के कृत्रिम रूपों को छोड़ दें और चीनी के प्राकृतिक रूप का सेवन करें, जैसे कि चेरी जैसे फलों से प्राप्त होनेवाली चीनी, जो हमारे लिए सेहत के मोती हैं।

चीनी का सेवन और बच्चे

बच्चों में कमजोरी आजकल चिकित्सा समुदाय के लिए एक चुनौती की तरह बनता जा रहा है।शरीर में उच्च शर्करा के साथ सबसे कमजोर समूह बच्चे ही हैं। भोजन में अत्यधिक मात्रा में चीनी का सेवन हमारे बच्चों की रक्त वाहिका संरचना को बदल देता है, जिससे भविष्य में उन्हें हृदय रोग का खतरा रहता है। यह जोखिम 7 वर्ष की आयु से हमारे बच्चों में पाए जा सकते हैं। समय की कमी के कारण माताएं प्राकृतिक स्रोतों से चीनी प्राप्त करने के बदले कृत्रिम रूप से बने मीठे पेय और जंक फूड दोनों का सेवन करने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करती हैं। लोगों के पास स्वस्थ भोजन पकाने का समय नहीं है; परिणामस्वरूप, सही कैलोरी युक्त खाद्य पदार्थों की कमी उल्लेखनीय रूप से बढ़ गई है। उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ हमारी थाली में बढ़ रहे हैं।

कुछ सलाह

हेल्दी स्नैक्स: हाई शुगर वाले नाश्ते को छोड़कर ढोकला, सूप, दलिया, ग्रेनेरी टोस्ट, क्रम्पेट, बैगल्स, सादा दही फल के साथ लें। अगर बहुत चीनी वाले खाद्य पदार्थ लेते हैं तो उसकी आवृति आधा कर लें।

अनाजों के लेबल को पढ़कर आप यह सुनिश्चित करते हैं कि वह उच्च फाइबर और स्वास्थय के लिए उत्तम है या नहीं, लेकिन फिर भी इसमें चीनी का स्तर ज्यादा होता है।

सप्ताहांत में, एक स्वादिष्ट विकल्प के लिए टोस्ट और तले हुए या उबले हुए अंडे ले सकते हैं। केक, पेस्ट्री, बिस्कुट या मिठाई के बजाय, सादे प्याज़, अनसाल्टेड नट्स, ब्रेड स्टिक, फल और सब्ज़ी की स्टिक, ओट या राइस केक पर थोड़ी मात्रा में पीनट बटर, कटा हुआ केला, चीज़ आदि लें। फिजी ड्रिंक के बजाय, थोड़ी मात्रा में ताजा फ्रूट जूस के साथ स्पार्कलिंग वॉटर आज़माएं या ज्यादा चीनी डाले बिना किसी फल को उखाड़कर या तीखा बेक करके, या कोई शुगर-फ्री बेक सामग्री को आजमाएं।

जेली और आइसक्रीम विकल्प के तौर पर क्रीम का उपयोग करें।

ढेर सारे जामुन के साथ सादे दही, या अन्य फलों का सलाद भी एक विकल्प है, जिन्हें आप चुन सकते हैं।

माता-पिता को एक रोल मॉडल होने की आवश्यकता होती है, क्योंकि बच्चे व्यवहार की नकल करते हैं । इसलिए यदि आप स्वस्थ आहार खाते हुए दिकेंगे, तो आपके बच्चे भी आपके कदमों का अनुसरण करेंगे। हमें अपने बच्चों को हेल्दी स्नैक्स खाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और उन्हें पौष्टिक आहार देना चाहिए। वे अधिक फल और सब्जियां खाएं और उनके भोजन में साबुत अनाज के विकल्प से फाइबर बढ़ाएं।

वास्तव में सक्रिय होना भी महत्वपूर्ण है, और विभिन्न खेलों की ओर प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देना भी बहुत महत्वपूर्ण है। उन्हें समझाएं कि "कम चीनी खाओ, तुम पहले से ही मीठे हो।"

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