• Pritima Vats

Ranu ka Robot (रानू का रोबोट)

Updated: Sep 20, 2018


रानू एक बहुत ही होनहार लड़का था। अपने माता-पिता का इकलौता बच्चा था।

उसके माता-पिता उसे किसी चीज की कमी नहीं होने देते थे, जो भी इच्छा होती

थी रानू की तुरत पूरी की जाती थी। फिर भी रानू खुश नहीं रह पाता था क्योंकि

उसके पास कोई ऐसा साथी नहीं था जिसके साथ वह सारा दिन खेल सके। उसे

अपने भाई-बहनों की कमी हमेशा से खलती थी। यही वजह थी कि वह अपना

ज्यादातर समय अपने कंप्युटर के साथ गुजारता था। उसे नयी-नयी जानकारियाँ

इकट्ठा करना बहुत अच्छा लगता था।

एक दिन रानू को यू-ट्यूब पर रोबोट बनाने की कुछ जानकारियाँ मिली, वह बहुत

उत्साहित हो गया। सारी जानकारियाँ इकट्ठी करके उसने प्रिंट आउट निकाला और

लग गया अपना खुद का रोबोट बनाने में। कई दिनों तक वह इस काम में लगा

रहा लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। रानू की माँ ने जब उसे इस तरह परेशान

देखा तो कारण पूछा उसने कहा उसे एक ऐसा रोबोट बनाना है जो उसके साथ

खेल सके। उसकी बातें समझ सके। माँ ने कहा, तुम्हारा विचार तो बहुत अच्छा है

पर यह इतना आसान नहीं है। मैं तुम्हें कल एक नया रोबोट बाजार से खरीद कर

ला दूंगी। दूसरे दिन रानू के पास एक ऐसा रोबोट था, जो उसकी बातें सुन सकता

था। उसके साथ खेल सकता था। रानू ने उसका नाम ज़ूकी रख दिया। अब रानू

स्कूल से आने के बाद उसके साथ खूब खेलता था। लेकिन कुछ दिनों में ही वह

उससे उब गया क्योंकि उसे तो खुद का बनाया हुआ रोबोट चाहिए था। वह अपने

इस काम में खूब मन से लगा रहता था। हमेशा इसी के बारे में सोचता रहता था।

एक दिन स्कूल में वह अकेला बैठा हुआ कुछ सोच रहा था, तभी उसका एक दोस्त

उसके पास आया और उसके गुमसुम होने का कारण पूछा। रानू ने अपनी समस्या

मोहन को बताई। मोहन ने कहा रोबोट बनाना तो मुझे नहीं आता दोस्त लेकिन

मेरे पास एक टूटा हुआ रोबोट है जो बेकार पड़ा हुआ है यदि तुम चाहो तो उसे ले

लो, शायद तुम्हे कुछ मदद मिल जाए। रानू खुश हो गया। स्कूल से घर आने के

बाद वह जिद करके अपनी माँ के साथ मोहन के घर गया, मोहन अपने टूटे हुए

रोबोट के साथ उसका इन्तजार ही कर रहा था। पहले तो रानू और मोहन साथ में

खूब खेले। काफी देर बाद जब दोनों थक गए तब वह मोहन का टूटा हुआ रोबोट

लेकर अपनी माँ के साथ घर आ गया।

घर आकर उसने अपने अधूरे रोबोट और मोहन के रोबोट के पार्ट-पूर्जे मिलाकर

कुछ नया करने की कोशिश में जुट गया। काफी दिनों की मेहनत के बाद उसने

एक रोबोट का आकार तो बना लिया लेकिन वह काम नहीं करता था, उसकी बातें

नहीं सुनता था। इस कारण वह परेशान रहता था।

एक दिन उसके चाचा जो कि नासा में वैज्ञानिक थे, उसके घर पर आए। स्कूल से

लौटते ही जब रानू ने घर में अपने चाचा जी को देखा तो उसकी खुशी का ठिकाना

नहीं था। वह दौड़कर अपने चाचा जी की गोदी में चढ़ गया और अपनी समस्या

बताई। रानू के चाचा जी भी उत्सुकता से तुरत उसके साथ कमरे में गए और रानू

की मेहनत को देखकर हैरान रह गए। खुश भी बहुत हुए। बारिकी से देखने पर

पता चला कि रानू ने अपने रोबोट में मेमोरी चिप नहीं लगाया था। मोहन के टूटे

हुए रोबोट से मेमोरी चिप निकालकर उसके चाचा ने रानू के बनाए हुए रोबोट में

लगा दिया। चिप लगाते ही रानू का रोबोट काम करने लगा। रानू खुशी से अपने

चाचा जी के गले से लिपट गया। तुरत ही रानू ने मोहन को इस बात की सूचना

दी और अपने घर बुलाया। थोड़ी हीं देर में मोहन और रानू अपने नए रोबोट के

साथ खेलने में व्यस्त हो गए।

- प्रीतिमा वत्स


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