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शिशु के लिए कपड़े की नैपी या डायपर.......

Updated: Oct 4, 2018


जब बात बच्चे के सुरक्षा और आराम की हो तो अक्सर माँएं अपने बच्चे की नैपी चुनने में दुविधा में पड़ जाती हैं। एक ओर जहाँ बाजार में कई तरह के डिस्पोजेबल डायपर मिल रहे हैं वहीं घर के बड़े-बुजुर्ग सूती कपड़े के मुलायम नैपी उपयोग करने की सलाह देते हैं। अमूमन हमारे घरों में तो जन्म के बाद शिशु को सूती कपड़े में लपेटकर रखने और उन्हें सूती कपड़े के ही लंगोट पहनाने का प्रचलन है।

ऐसे में आप अपने शिशु के लिए किसका चुनाव करती हैं यह पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है क्योंकि दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं। आइए हम इन दोनों विकल्पों के बारे में थोड़ा जाने.......

कपड़े की नैपी पहनाने के फायदे...

यह एक सस्ता विकल्प है आप चाहें तो घर पर भी सूती कपड़े से इसे बना सकती हैं। कपड़े की नैपी गर्मी के मौसम में शिशु के लिए सबसे आरामदेह होता है। इसके इस्तेमाल से शिशु को हल्का महसूस होता है और अलग से कोई भार नहीं लगता। चूँकि कपड़े की नैपी पतली होती है इसलिए शिशु के शरीर के हर हिस्सों में हवा लगती है, जिससे रैशेज, पसीने आदि की समस्या नहीं होती। बस आप इसकी साफ सफाई का ध्यान अच्छी तरह से रखें।

कपड़े की नैपी पहनाने के नुकसान......

कपड़े की नैपी बार-बार बदलनी पड़ती है जो आपको शायद झंझट का काम लग सकता है और खासकर बाहर जाने के दौरान तो बिल्कुल भी नहीं।

घर में दिनभर तो माँएं आराम से यह काम कर लेती हैं पर रात को रातभर नींद खराब होती रहती है। नवज़ात शिशु कई बार नैपी गीला करते हैं और उन्हें रात में भी पॉटी करने की आदत होती है। ऐसे में कपड़े की नैपकीन को ज़ल्दी-ज़ल्दी बदलना होता है जिससे माँ और बच्चे दोनों की नींद खराब होती है। इसके अलावा हो सकता है कि शिशु नैपी गीली करने के बाद कोई संकेत ना दें ऐसे में देर तक गीले कपड़ों में रहने से उसे बुखार या कफ की समस्या हो सकती है।

डिस्पोजेबल डायपर पहनाने के फायदे...

सर्दियों में शिशु अधिक गीला करते हैं, ऐसे में डायपर पहनाने से उन्हें गीलेपन का एहसास कम से कम होता है। डायपर पहना देने के बाद बच्चे सुकून से जहाँ मर्जी वहाँ खेल सकते हैं क्योंकि बिस्तर गीला करने का डर नहीं रहता। रात को डायपर पहनाने का एक फायदा यह भी है कि बच्चे के साथ-साथ दिनभर की थकी- हारी माँ भी आराम की नींद सो सकती हैं।

दिनभर डायपर पहनाने के नुकसान......

दिनभर डायपर पहनाने के कई नुकसान हो सकते हैं लेकिन तब, जब आप एक ही डायपर कई घंटों तक पहनाकर रखें । ऐसे में साफ-सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। नैपी बदलने के दौरान ऐंटी रैशेज क्रीम या पाउडर भी लगाना चाहिए।

अगर सहूलियत हो तो हर माँ को यह कोशिश करनी चाहिए कि अपने शिशु को कम से कम डायपर पहनाएँ। बाहर जाने के दौरान या रात में सोने के पूर्व डायपर पहनाना तो ठीक है लेकिन 24X7 डायपर पहनना शिशु को परेशान करने के साथ-साथ त्वचा को भी नुकसान पहुँचा सकता है।

कामकाजी महिलाओं के पास समय की कमी होती है जिसकी वजह से डायपर इस्तेमाल करना उनकी मजबूरी हो जाती है ऐसे में नवज़ात शिशु को डायपर पहनाने के दौरान कुछ सावधानियां बर्तनी चाहिए जैसे 2-3 घंटे के अंतराल पर डायपर चेक करना चाहिए या उससे पहले अगर आपको लगे कि शिशु का डायपर गीला हो चुका हैै तो तुरंत ही साफ करना आवश्यक है। वैसे आपको ये भी मालूम हो कि ताज़ा शोध के मुताबिक जो बच्चे शुरुआत से ही हमेशा डायपर पहनते हैं उनके पैरों के बीच की दूरी बढ़ने के कारण उनकी चाल थोड़ी अलग हो जाती है।

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-प्रीतिमा वत्स

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