• Pritima Vats

मुहवारे की ऐसी की तैसी


-नेहा

दोपहर में बेटे को सुलाने की कोशिश चल रही थी। सोते समय बच्चों के पास दुनिया भर की बातें होती हैं, कितने सारे सवाल होते हैं। आप सुबह से काम कि थकान में रहे फिर भी धेर्य बनाये रखना होता है। ज़रूरी नहीं हरेक सवाल का जवाब हो पर बच्चों को ये कहना कि मुझे नही आता उन्हें बहुत दुखी करता है। बहुत सारे हिसाब-किताब, जोड़-जाड़ करने के बाद आप किसी प्रश्न का उत्तर दे भी दें तो उसमे से भी एक प्रश्न निकल आता है। उनका प्रश्न न हुआ एक तरह से तोप से गोला दागना हुआ। एक गोला अभी आपको लगा भी नही कि दूसरा तैयार हो जाता है।

इतने प्रश्न का उत्तर तो मैंने अपनी परीक्षा में भी नही दिए थे। ये ऐसा है तो ऐसा क्यों है और वो वैसा है तो वैसा क्यों है ? बस बातों में उलझते रहिये। उफ़्फ़ सो जा न बेटा। सोता हूँ मम्मा पहले मुझे ये बताओ घोड़े बेचकर सोने का मतलब क्या होता है ? अब ये कहाँ सुना तुमने ? मैं नही बताऊंगा फिर तुम गुस्सा करोगी। इसमें गुस्से करने कि क्या बात है। एक्चुअली मैंने आज वो कार्टून देखा जो तुम मुझे देखने से मना करती हो। फिर क्यों देखा ? अरे! थोड़ा सा ही देखा ना मम्मू। पर देखा ही क्यों जब मैंने मना किया था अब मैं तुमसे बात नहीं करुँगी। तुम हमेशा यही बोलती हो कि बात नहीं करुँगी (गुस्सा होकर) अगर मैं तुमसे बात करना बंद कर दूंगा ना तो रोती रहना। मैं बिलकुल नहीं रोउँगी उलटे मेरा मुँह नहीं दुखेगा, तुम्हारे साथ -साथ बक बक करके। अरे! मैं तुम्हारा मुँह दबा देता हूँ पर तुम मुझे बताओ ना ‘घोड़े बेच कर सोने’ का मतलब। इसका मतलब है चैन का की नींद सोना। चैन मतलब गले का चैन। अरे! चैन का मतलब ‘आराम’ से सोना। अच्छा ! तो घोड़ा ही क्यों बेचना गधा भी तो बोल सकते हैं ,शेर भी बोल सकते है। कबूतर ठीक रहेगा मम्मा ‘कबूतर बेच कर सोना’। अरे ये कहावत है, मुहावरा है तुम उसे बदल नही सकते। क्यूँ? मेरी मर्ज़ी मैं क्या बेच कर सोना चाहूँ । कभी मैं आइस क्रीम बेच कर भी सो सकता हूँ। तुम तो न चैन से सोते हो न सोने देते हो। फिर तुम इस कहावत के पीछे क्यों पड़े हो? क्योंकि हमेशा बेचारा घोड़ा ही बिकता है। (झुंझलाहट में ) तुम्हे जो बेचना है बेचो पर जल्दी से सो जाओ। मेरा मूड देखकर उसने झट से कहा अच्छा-अच्छा सोता हूँ मेरी माँ ! आँखे उसने ज़बरदस्ती बंद की। मेरे दिमाग में चल रहा था कि इसने तो मुहावरे की ऐसी की तैसी कर दी।

-नेहा

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