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मोनिया से महात्मा तक


गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति से आई पुस्तक मोनिया बच्चों के लिए बहुत ही अच्छी है।

इस पुस्तक के माध्यम से बच्चों को बेहद सरल ढंग से गांधी जी के जीवन के बारे में बताया जा सकता है। पुस्तक के लेखक हैं हेमन्त और इरफान ने अपने खूबसूरच रेखाचित्रों से इसे सजाया है।

पुस्तक की भूमिका में मणिमाला जी ने लिखा है कि अक्सर देश-विदेश से बच्चे गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति में आते रहते हैं और गांधी जी के बारे में पूछते हैं कि गांधी जी जब हमेशा सच बोलते थे, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते थे तो फिर उन्हें किसी ने क्यूँ मारा। और भी कई सवाल जैसे बापू इतने महान कैसे हो गए? क्या वे महान हीं पैदा हुए थे। ? वगैरह,वगैरह........

बच्चों के कितने ही सवाल ऐसे होते हैं जिन्हें समझाने में बड़े खुद हीं उलझ जाते हैं। लेकिन अब उनके पास इस किताब के रूप में गांधी जी से संबंधित करीब-करीब हर जबाव मौजूद है।

और अंत में कमला प्रसाद चौरसिया जी की यह कविता थोड़े से शब्दों में बहुत कुछ कहती हुई प्रतीत होती है।

'वैष्णव जन तो तेने कहिये'

गाकर पीड़ा भोगी।

'ईश्वर-अल्ला तेरे नाम'

भजकर हुआ वियोगी।

कुछ कहते, 'भारत की आत्मा'

कुछ कहते हैं सन्त।

बापू बन गया महात्मा,

साबरमती का सन्त।

सत्य-अहिंसा की मूरत वह,

चरखा-खादी वाला।

आजादी के रंग में जिसने,

जग को ही रंग डाला।

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