• Pritima Vats

माँ की याद

Updated: Aug 24


-उमा अर्पिता

माँ तुम कहा करती थीं कि

शादी के बाद लड़की का दिन सुबह होने से पहले ही निकल आता है और रात सबके सो जाने के बाद शुरू होती है। कभी जाना ही नहीं कि तुम इतना कम कैसे सोती थीं। आज जब खुद को नहीं पता कि कब सोई कब जागी तब तुम्हें बहुत याद करती हूँ। एक एक कर सबकी इच्छाएँ पूरी करते करते जब अपनी चाहत को भूल जाती हूँ तब तुम्हें बहुत याद करती हूँ किसी की खाँसी, किसी का बुखार किसी को सहलाती हूँ किसी को मनाती हूँ चाहकर भी रो नहीं पाती हूँ तब तुम्हें बहुत याद करती हूँ सबसे मिलती हूँ हँसती हूँ, मुस्कराती हूँ कभी शेफ तो कभी नर्स बन जाती हूँ जब अपनी तबीयत का ख्याल नहीं आता तब तुम्हें बहुत याद करती हूँ बच्चे अपने अपने रास्ते चल दिए मैं मूक दर्शक बनी देखती रही माँ तुम भी तो कितनी अकेली रह गई थीं तब नहीं समझी थी आज अकेलेपन का दंश झेलती हूँ  तब तुम्हें बहुत याद करती हूँ।

-उमा अर्पिता (लेखिका एक जानी मानी कवयित्री हैं, हाल ही में नेशनल बुक ट्रस्ट में संपादक के पद से सेवानिवृत हुई हैं। इन दिनों स्वतंत्र लेखन, अपने बच्चों और बागवानी में जीवन के सुख तलाश रही हैं।)

48 views

©2018 by Suno Mummy........