• Pritima Vats

बच्चों में बढ़ता गुस्से का मीटर



आजकल अक्सर माँओं की यह शिकायत होती है कि उसके बच्चे को गुस्सा बहुत आता है या उसका बच्चा बहुत जिद्दी है। लेकिन क्या आपने कभी इसका कारण जानने की कोशिश की है। नौकरी-पेशा करनेवाली माँओं के बच्चे ज्यादातर जिद्दी, एकाकी और गुस्सैल स्वाभाव के होते हैं। तभी तो कहा जाता है कि बच्चों की परवरिश सिर्फ साधन जुटा देने से ही नहीं होता है। उसे एक प्रापर केयर और आपके सानिध्य की भी जरूरत होती है। बच्चों के साथ बिताया गया आपका समय और प्यार उसके व्यक्तित्व निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।

अधिकांश बच्चे वही सीखते हैं जो वो बचपन से देख रहे होते हैं। इसलिए माता-पिता होने के नाते आपको उनके सामने एक अच्छा उदाहरण सेट करने की जरुरत है।

स्कूल के टीचर का बच्चे के साथ बुरा बर्ताव भी उसका स्वभाव गुस्सैल बनाता है। हमें अपने बच्चे को किसी के सामने डाँटना नहीं चाहिए बल्कि उसे एकांत में बैठाकर प्यार से समझाना चाहिए। अक्सर हम बच्चे की गलती पर उसके दोस्तों या रिश्तेदारों के सामने ही उसे सज़ा देने लगते हैं ऐसा करने से बच्चे शर्मसार होते हैं, उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है और वह विद्रोही स्वाभाव का हो जाता है।

बच्चों के बेहतर परवरिश के कुछ टिप्स यहाँ पर दिये गए हैं जो आपके बच्चों के भविष्य निर्माण में सहायक हो सकता है….

* रोज कम से कम 1 घंटे का समय सिर्फ बच्चे के लिए निकालें

* आप सिर्फ उसकी माँ बनकर नहीं रहें बल्कि उसकी टीचर, उसकी दोस्त बनने की भी कोशिश करें।

* हर बच्चा अपने-आप में खास होता है। उसकी काबिलियत को पहचाने और उसे अपना सोशल इमेज ना बनाएँ। किसी भी बच्चे से अपने बच्चे की तुलना कभी न करें।

* छोटी उम्र से हीं अपने बच्चे को समय की पाबंदी का पाठ पढ़ाएँ।

* बच्चों को किसी गलती पर डाँटने की बजाय उसे प्यार से समझाएँ।

* बच्चों की किसी भी गलती की अनदेखी कतई ना करें।

* बच्चों की हर जिद्द को पूरा करने की बजाय उसे उचित और अनुचित में फर्क करना सिखाएँ।

* उसकी बातों को ध्यान से सुनें फिर उसको सही-गलत दिखाने का प्रयास करें । अगर आपके बच्चों को गुस्सा बहुत ज्यादा आता है तो उसका कारण जानने की कोशिश करें, और शान्ति पूर्ण तरीके से उसे ठीक करने की कोशिश करें।

स्कूल जाने वाले बच्चों का जिक्र करें तो उन्हें पढाई, परीक्षा, खेल-कूद, हॉबी क्लासेज़ सभी में अव्वल आने को लेकर कई तरह के दबाव होते हैं इसमे कई बार बच्चा मानसिक तनाव का शिकार हो जाता है। जब बच्चे माता पिता के सपनों को साकार करने में असमर्थ साबित होते हैं तो उनमें हीन भावना, ईर्ष्या की भावना पनपने लगती हैं ऐसे में उनके स्वभाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और वे चिड़चिड़े हो जाते हैं ।

जब आपके दो या तीन बच्चे हों तो कई बार बच्चों को ये महसूस होने लगता है कि उन्हें कम प्यार मिल रहा है और उनके छोटे भाईयों या बहनों को घर के सदस्य अधिक लाड़-प्यार दे रहे हैं। ऐसे में बच्चा आपका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए आक्रामक हो जाता है या अपने सिबलिंग्स से झगड़ा, मार-पीट करने लगता हैं।

आपके बच्चे के दोस्त कैसे हैं, इसपर भी आपको ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि घर के बाद दोस्त हीं होते हैं जिनका बच्चों पर गरहा छाप होता है। कई बार गलत दोस्तों के बहकावे में आकर नई चीजें आज़माने के लिए या गलत चुनौती स्वीकार करते हुए उनमें गलत चीजों के सेवन की आदत भी लग जाती है। इसलिए अच्छे दोस्त चुनने की सलाह बच्चों को हमेशा दें।

बच्चे अकेले में मोबाईल पर क्या देख रहे हैं इसकी पूरी निगरानी रखें कई बार वो उत्सुकता वश गलती कर बैठते हैं।

.........................................

©2018 by Suno Mummy........