• Pritima Vats

बच्चे पालने की कला

चाहे कामयाबी की कितनी ही ऊँचाई को क्यों न छू लें महिलाएँ पर माँ बनना हर औरत का सपना होता है। सौ में से करीब नब्बे महिलाएँ ऐसी हैं जिनके लिए माँ बनना दुनिया की सबसे बड़ी खुशियों में से एक है। हालांकि बच्चा पालना करीब-करीब सबके लिए एक बड़ी चुनौति से कम नहीं होता है।

हाल हीं में हुए अमेरिका के एक सर्वे में इस बात का पता चला है कि करीब 53 फीसदी महिलाओं को बच्चे के जन्म के शुरुआती तीन महीने कैसे बीत जाते हैं, पता हीं नहीं चलता। वे हर वक्त यही सोचती रहती हैं कि कुछ गलती न हो जाए, उसके नन्हें से शिशु को उसकी किसी गलती से कोई नुकसान न पहुँचे।

करीब 21 फीसदी महिलाएँ अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद बच्चों की देखभाल के लिए इंटरनेट का सहारा लेती हैं। वह अपने बच्चे को स्तनपान तक इंटरनेट की मदद से सीखकर कराती हैं।

करीब 67 फीसदी महिलाएँ बच्चे को नुकसान से बचाने के डर से स्तनपान कराने की बजाय पाउडर वाला दूध पिलाना बेहतर समझती हैं।

करीब 30 फीसदी महिलाओं को इस बात का अंदाजा ही नहीं होता है कि उन्हें अपने शिशु को कितनी मात्रा में दूध पिलाना चाहिए कि उसका शिशु स्वस्थ रहे।

इन तमाम समस्याओं को समझने और उससे निजात पाने में महिलाओं को करीब 3 महीने का समय लग जाता है। हर बच्चे की कुछ अपनी विशेषता होती है। वह अपने ढंग से अपनी परेशानी और खुशी जाहिर कर देता है जिसे उसकी माँ धीरे-धीरे अच्छी तरह समझ जाती हैं।

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