• Pritima Vats

पुरस्कार वितरण

स्कूल में जबसे यह घोषणा हुई है कि कक्षा तीन के बच्चों को उसकी प्रतिभा, स्वास्थ्य, सफाई और अनुशासन के आधार पर पुरस्कार दिया जाएगा, तबसे हर माँ अपने बच्चों के ऊपर कुछ ज्यादा हीं ध्यान देने लगी हैं। अपने किटी पार्टी, मोबाइल या दोस्तों के साथ समय बिताने वाली महिलाएँ भी अपने बच्चों को पुरस्कार दिलाने के लिए उसपर ज्यादा मेहनत करने लगीं हैं। एक गोलू की माँ हीं है जो शुरु से ही गोलू के ऊपर अपना ध्यान देती हैं। गोलू की माँ तो सुबह से हीं अपने बेटे की पूरी दिनचर्या तय कर लेती हैं। उसे अपने बेटे का पूरा ध्यान खुद हीं रखना होता है, क्योंकि गोलू के पिताजी घर से बहुत दूर आसाम की किसी फैक्ट्री में काम करते हैं और साल में बस एक बार हीं कुछ दिनों के लिए घर आ पाते हैं।

सुबह छह बजे से गोलू का दिन शुरु हो जाता है। सबसे पहले वह उठकर अपने माँ के चरण स्पर्श करता है और फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस जाता है, नींद आती रहती है, लेकिन गोलू को अपनी माँ की कही हर बात याद रहती है। वह जल्दी-जल्दी फ्रेश होकर ब्रश करता है और बाहर आ जाता है। अपने स्कूल बैग को तैयार करता है और कवर्ड से स्कूल ड्रेस को भी वह खुद हीं निकालता है। झटपट नहाकर जब तक ड्रेस पहनकर तैयार होता है उसकी माँ उसके लिए टिफिन तैयार कर चुकी होती है तथा नाश्ता भी लगा चुकी होती है। गोलू आराम से बैठकर नाश्ता करता है और स्कूल जाने के लिए तैयार हो जाता है। उसका स्कूल घर से ज्यादा दूर नहीं है। इसलिए वह अपनी माँ के साथ पैदल हीं जाता है। रास्ते में उसकी माँ क्लास में याद करने के लिए दिए गए सवालों को एक बार गोलू को पूछ लेती है जिससे कि वह क्लास में कुछ भूल न जाए।

दोपहर को भी जब गोलू की छुट्टी होती है तो उसकी माँ उसे लेने के लिए स्कूल की गेट पर खड़ी होती है। लौटते समय पूरे रास्ते गोलू खुश होकर अपनी माँ को अपनी दिनचर्या सुनाता है। किस टीचर ने उसे वेरीगुड कहा, किस टीचर ने उसके हेन्डराइटिंग की तारीफ की या फिर आज स्कूल में किस सबजेक्ट में क्या होमवर्क मिला।

घर आकर दोनों माँ-बेटे आराम से खाना खाकर थोड़ी देर टीवी देखते हैं। फिर होमवर्क की बारी आती है। जबतक होमवर्क बनाता है तबतक उसके खेलने का समय हो जाता है। एक घंटे के लिए पार्क में अपने दोस्तों के साथ खेलने चला जाता है।

उधर गोलू के पक्के दोस्त शिबू और रामू उसकी प्रतिक्षा कर रहे होते हैं। शिबू तो आज भी उदास है, क्योंकि उसकी माँ ने उसे बहुत डाँटा है। कारण उसका होमवर्क पूरा नहीं था और घर पर शिकायत आई थी। रामू को भी सुबह उठने में देर हो गई थी जिससे स्कूल बस छूट गई और उसे रिक्शे से स्कूल जाना पड़ा था। उसके दोस्त उससे पूछते हैं कि, "गोलू तुम हर काम समय पर कैसे कर लेते हो? तुम्हारी नींद कैसे खुल जाती है सुबह जल्दी?"

गोलू बड़े प्यार से अपने दोस्तों को जबाव देता है, " मैं हमेशा अपनी माँ की बात मानता हूँ। रात को माँ मुझे नौ बजे सो जाने के लिए कहती है तो मैं सो जाता हूँ। जिससे सुबह मेरी नींद अपने-आप छह बजे खुल जाती है और मैं अपना हर काम समय पर कर लेता हूँ।" गोलू की बात सुनकर उसके दोस्तों ने तय किया कि हम भी अपनी माँ की बात मानेंगे और रात को टीवी देखने की बजाय सही समय पर सो जाया करेंगे।

उस दिन से गोलू के दोनों दोस्त भी समय पर स्कूल पहुँचते और उनका होमवर्क भी कम्पलीट रहने लगा।

यह देखकर टीचर को बड़ा ही आश्चर्य हुआ। उन्होंने शिबू और रामू दोनों से पूछा, "आजकल तो तुम दोनों ने कमाल कर दिया है बच्चो। समय पर स्कूल भी आते हो और होमवर्क भी पूरा करते हो। ऐसा क्या हुआ जो इतना परिवर्तन आ गया है तुमलोगों में।"

तब शिबू और रामू ने कहा," हमें गोलू ने बताया कि वह अपनी माँ की हर बात मानता है, जिससे उसका हर काम समय पर पूरा हो जाता है और रात को देर रात तक न जागकर ठीक नौ बजे सो जाता है। हमनें भी वही किया और धीरे-धीरे हमारा भी हर काम समय पर होने लगा। अब तो हमारी माँ भी हमें प्यार करती हैं और कभी नहीं डाँटती हैं। लगता है अब हमें भी पुरस्कार मिल सकता है। यह सुनकर टीचर बहुत खुश हुई तथा उन दोनों के साथ-साथ गोलू को भी धन्यवाद दिया।

पुरस्कार के बहाने स्कूल के बच्चों में जो सकारात्मक बदलाव आए थे उसने स्कूल की हवा हीं बदल दी थी। आजकल ज्यादातर बच्चे समय पर आते हैं। उनके यूनिफार्म तथा बैग सभी करीने से तैयार किये हुए होते है। पहले जहाँ होमवर्क के लिए टीचर को रोज चीखना पड़ता था, वहीं आजकल सभी बच्चे करीब-करीब अपना होमवर्क करके आते हैं। स्कूल अपसेन्ट भी बहुत कम हीं बच्चा होता है।

समारोह का दिन नजदीक आता जा रहा है और बच्चों का उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। समारोह वाले दिन तो सभी बच्चे नियत समय पर अपने माता-पिता के साथ स्कूल पहुँचे। गोलू भी अपनी माँ के साथ साफ-सुथरे कपड़े पहनकर स्कूल पहुँचा।

मुख्य अतिथि आए और अपना भाषण दिया। बच्चों को समय का महत्व और अनुशासन के बारे में बहुत कुछ बताए। उसके बाद आई पुरस्कार की बारी।

तीसरी क्लास की क्लास टीचर मंच पर आईं और उन्होंने सभी बच्चों की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, "जबसे पुरस्कार की घोषणा हुई है, हमारी क्लास के सभी बच्चों में इतने सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं कि मेरी नजर में सभी पुरस्कार के हकदार हैं। इसलिए मैंने क्लास के सभी बच्चों के लिए सर्टिफिकेट तैयार करवाया है।" टीचर की इस बात पर पूरा हाल तालियों की आवाज से गूँज उठा। जब शोर कुछ कम हुआ तब उन्होंने कहा कि सब बच्चों ने अपने लिए तो खूब तैयारी की है, और खूब अच्छे बच्चे भी बन गए हैं, लेकिन आपलोगों में से एक बच्चा ऐसा भी है जो अपने साथ-साथ दूसरों को भी अच्छाई की राह पर लाने में मददगार साबित हुआ है। आज का यह पुरस्कार उसी बच्चे को जाता है और उसका नाम है- गोलू। टीचर ने गोलू की तरफ इशारा करके कहा, गोलू अपनी माँ के साथ मंच पर आ जाओ।

हॉल में फिर से तालियाँ बजने लगीं। गोलू अपनी माँ के साथ धीरे-धीरे चलता हुआ मंच की ओर पुरस्कार लेने के लिए जाने लगा।

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