• Pritima Vats

प्रदूषण का बच्चों पर असर

प्रदूषण वैसे तो सबके लिए बहुत खतरनाक है, लेकिन छोटे-छोटे बच्चे इसका ज्यादा शीकार होते हैं। विश्व स्वास्थय संगठन के अनुसार पूरे विश्व में सन् 2016 ई0 में हुई प्रदूषण की वजह से पाँच साल से कम उम्र के एक लाख से ज्यादा बच्चों की मृत्यु हो गई थी, जिसमें सिर्फ वायु प्रदूषण की वजह से करीब 60 हजार बच्चों की जान चली गई। इसके अलावा बहुत से ऐसे बच्चे हैं जो प्रदूषण की वजह से अस्थमा,एलर्जी,आँखों की

परेशानी,चिड़चिड़ापन, भूलने की बीमारी और कैंसर जैसी गंभीर बिमारियों के चपेट में हर साल आते रहते हैं। बच्चों का खुले मैदान में खेलना, घर से बाहर निकलकर घूमना आदि जहाँ कभी सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक माना जाता था, अभी हानिकारक बताया जा रहा है। यहाँ तक कि स्कूलों में भी खेल-कूद बंद कर दी गई है। घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनकर रहने की सलाह दी जा रही है।

गर्भ में पल रहे बच्चों को भी हो सकता है गंभीर बीमारी-

गर्भ में पल रहे बच्चे भी इस प्रदूषण की मार से बचे नहीं हैं, उन्हें भी गंभीर बिमारियाँ हो सकती हैं। सर गंगाराम हस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ0 धीरेन गुप्ता ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक शोध के अनुसार, माँ के गर्भ में आने के बाद शुरु के एक महीने में बच्चा वायु प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित होता है। माँ जब साँस लेती है तो वायु में मौजूद प्रदूषक कण उसके शरीर में पहुँचते हैं। यह इतने छोटे होते हैं कि कुछ फेफड़ों से चिपक जाते हैं कुछ खून में मिल जाते हैं और कुछ तो प्लेसेंटा तक पहुँच जाते हैं। प्लेसेंटा शरीर का वो हिस्सा है जो गर्भ के पास होता है और इससे बच्चे को पोषण मिलता है। जब प्लेसेंटा में प्रदूषण के कण जमा होते हैं तो वहाँ रक्त प्रवाह में रुकावट आने लगती है। रक्त कम पहुँचने से बच्चे का विकास रूक जाता है। इसकी वजह से बच्चों में गंभीर बीमारी जन्म से पहले ही घर कर जाती है। ऐसे बच्चे ज्यादातर शारीरिक या मानसिक रूप से अपंग पैदा होते हैं।

-प्रीतिमा वत्स



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