• Pritima Vats

पुत्री वन्दना, गौरी के जन्मदिन पर

-सतीश सक्सेना **************************************

क्यों तुम चिंतित से लगते हो, बेटी जीत दिलाएगी ! विदुषी पुत्री जिस घर जाए खुशिया उस घर आएँगी ! कर्मठ बेटी के होने से , बड़े आत्म विश्वासी गीत ! इसके पीछे चलते चलते,जग सीखेगा,जीना मीत !

जब से बेटी गोद में आई घर में रौनक आयी है ! दोनों हाथों दान किया पर कमी , कभी न आई है ! लगता नारायणी गा रहीं, अपने घर में आकर गीत ! उनके हाथ, बरसता वैभव, अक्षय होते मेरे गीत !

जब से इसने चलना सीखा, घर में खुशियाँ छायीं थी ! इसके आने की आहट से चेहरे, रौनक आयी थी ! स्नेही मन जहाँ रहेगी , खूब सहारा दें जगदीश ! अन्नपूर्णा दान करेगी , आशिष देते मेरे गीत !

सुबह सबेरे उठते इसके चहक उठे, मेरा घर बार ! इसके जाने से ही घर में सूना सा लगता संसार ! जलतरंग सी जहाँ बजेगी, मधुर सुधा बरसाए प्रीत ! बाबुल का सम्मान बढाए, करें प्रभावित मेरे गीत !

रोज कबूतर करके आएं अभिनंदन गुड़िया के घर का ! सारे घर को महका जाएँ , कुछ चन्दन, उसकी यादों का ! चंचल, कल्याणी, मनभावन, जहाँ रहे, बजता संगीत ! यादें इसकी जब जब आएं, आह्लादित हो जाते गीत !

अच्युतम केशवम पूज्य नारायणम ! ईश पुरुषोत्तमम कृष्ण आवाहनम सिद्धिविनायक स्थापित कर, विष्णु स्तवन गायें गीत ! सारे द्वार सुरक्षित उसके , निश्चित रहते, मेरे गीत !

ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे, सर्वार्थ साधिके ! शरण्ये त्रयम्बके गौरि नारायणी नमोस्तु ते ! दोनों कर श्रद्धा से जोड़े, पुत्रि वन्दना करते गीत ! गौरी गरिमामयी रहेगी, आशीर्वाद भेजते गीत ! -सतीश सक्सेना

(लेखक एक मैराथन रनर और जाने माने कवि हैं।)

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