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डिप्थीरिया से बचने के उपाय


दिल्ली और उत्तरप्रदेश के कई इलाकों में हर माँ अपने बच्चे को लेकर इन दिनों डिप्थीरिया नाम की बीमारी से परेशान और डरी हुई हैं। शहर में बच्चे अचानक बीमार हो रहे हैं और दवा की कमी से भी जूझ रहे हैं। दवाई अगर मिल भी जाती है तो या तो बहुत देर हो चुकी होती है या फिर बहुत सारे पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। एंटी-डिप्थीरिया सीरम की कीमत इन दिनों 10 हजार रूपये से ज्यादा हो गई है।

हर माँ को यह पता होना चाहिए कि आखिर क्या है यह डिप्थीरिया बीमारीः-

डिप्थीरिया को गलघोंटू नाम से भी जाना जाता है। यह कॉरी नेबैक्टेरियम डिप्थीरिया बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है। इसके बैक्टीरिया टांसिल व श्वास नली को संक्रमित करते हैं। संक्रमण के कारण एक ऐसी झिल्ली बन जाती है, जिससे साँस लेने में रुकावट होती है। यह बीमारी बच्चे को अधिक होती है। इस बीमारी के होने पर गला सूखने लगता है, आवाज बदल जाती है। इलाज न कराने पर शरीर के अन्य अंगों में संक्रमण फैल जाता है। डिप्थीरिया पीड़ित बच्चे के संपर्क में आने पर अन्य बच्चों को भी बीमारी के होने का खतरा रहता है।

डिप्थीरिया के तीन टीके लगते हैं। आप अपने बच्चों को किसी भी सरकारी अस्पताल में ले जाकर यह टीका बड़ी आसानी से मुफ्त में लगवा सकती हैं और अपने बच्चे को इस भयावह बीमारी से हमेशा के लिए बचा सकती हैं। आपकी थोड़ी सी सूझबूझ से आपका बच्चा गंभीर परेशानी में पड़ने से बच सकता है। डिप्थीरिया के गंभीर मामलों में यह दिल और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचा सकता है, यहाँ तक कि यह मृत्यु का कारण भी बन सकता है। डॉक्टर अंकित ओम के मुताबिक शिशु को इस रोग से बचाने के लिए टीका लगवाना आवश्यक है। इस टीके को डीपीटी भी कहा जाता है। एक साल के बच्चे को डीपीटी के तीन टीके लगते हैं। इसके बाद डेढ़ साल पर चौथा टीका और चार साल की उम्र पर पाँचवाँ टीका लगता है। टीकाकरण के बाद डिप्थीरिया होने की संभावना नहीं रहती है।

अगर किसी बच्चे को खाँसी,जुकाम और बुखार हो रहा है और उन्हें बचपन में डीपीटी का इंजेक्शन नहीं पड़ा है तो उनकी माँओं से अनुरोध है कि तुरत अस्पताल ले जाएं अपने बच्चे को और इस गंभीर बीमारी के चपेट में आने से बचें। एक बार यदि बीमारी बढ़ गई तो यह घातक साबित हो सकती है।

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