• Pritima Vats

डाकिया डाक लाया...........


-नेहा

मेरी पुरानी फाइल्स में कुछ पोस्टकार्ड मिले। मैंने बेटी को दिखाया वो बड़ी उत्साहित हुई और बोली, ‘अरे! मेरी हिंदी की बुक में इसकी फोटो है। ये पहले चिट्ठी लिखने के काम में आती थी।’ मैंने कहा हाँ ये पोस्टकार्ड है मैंने बहुत पोस्टकार्ड लिखे हैं। अच्छा! पर ऐसे खुले में चिट्ठी लिखते थे तुमलोग। हाँ पहले बहुत लिखते थे पर कोई इम्पोर्टेन्ट बात होती थी तो उसे अंतर्देशीय पत्र में लिखते थे वो एक तरह का एन्वेलॉप होता था | पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय,लिफाफा, डाक–टिकट ये सारी चीजें तुम्हारी उम्र के बच्चों के लिए नयी है। तुमने इसे बस स्कूल बुक्स में पढ़ा है। तुम्हे शायद ये पता ना चले कभी कि घर पर चिट्ठी आना हमें कितना उत्साहित करता था। बेटी ने झट से कहा, ‘पर मुझे ये पता है कि पोस्टमैन चिट्ठी डालने आता है।’ हाँ हिंदी में डाकिया कहते हैं। बहुत सारे गाने बने हैं फिल्मों में डाकिया को लेकर एक गाना बड़ा फेमस हुआ था डाकिया डाक लाया ......| ‘एक और ...एक और.... संदेशे आते हैं। इस पर हमने इंडिपेंडेंस डे पर डांस किया था। अभी तो मम्मा मेल्स,वाट्सएप्प पर गाने बनते हैं।’ तुम्हे बड़ा पता है गानों के बारे में। बेटी हंसकर बोली, ‘मुझे सब पता है पर मम्मा मुझे डाकिये के बारे में कुछ और बताओ ना मुझे बड़ा इंट्रेस्टिंग करैक्टर लग रहा है। मैंने उसे बताना शुरू किया, ‘ डाकिया ज़्यादातर साइकिल से आता था। उसे देखकर बच्चों की बाँछे खिल जाती थी। गली में बच्चे बहुत दूर तक उसकी साइकिल के पीछे भागते थे। डाकिया भी खुश होता था अपने को इतना महत्वपूर्ण जान कर । जो डाकिया हमारे घर के तरफ़ हमेशा आता था उससे तो दोस्ती जैसी हो जाती थी। गर्मी के दोपहर कभी बाहर चबूतरे पर बैठ कर सुस्ताता था। अपने झोले का तकिया बनाकर कभी-कभी थोड़ी देर लेट भी जाता था। कभी –कभी उससे चाय-पानी पूछा जाता था। कभी–कभार मम्मी पापा उससे घर- परिवार के बारे पूछते थे। वो भी हमारे परिवार के बारे में बहुत कुछ जानते थे मसलन बच्चे किस क्लास में हैं ,गाँव- घर कहाँ है , रेगुलरली जिनकी चिट्ठी आती थी उनकी भी थोड़ी बहुत चर्चा होती थी । बुरी ख़बर से डाकिया भी आहत होता था। हमारी ख़ुशी में वो भी खुश होता था। डाकिया से एक कनेक्शन जैसा हो जाता था। वो हमारी गुम हुई चिट्ठियों को भी कहीं से ढूँढ कर निकाल लाता था । इस काम के लिए उसे बख्शीस भी मिलती थी।

बेटी को इस कहानी में बड़ा मज़ा आया। उसने उत्साहित होकर कहा मम्मा मुझे एक पोस्टकार्ड दो ना एक चिट्ठी लिखनी है। तुम किसे चिट्ठी लिखोगी ? वो सीक्रेट है। मैंने उसे पोस्टकार्ड पकड़ाया और अपने काम में बिजी हो गयी। करीब आधे घंटे के बाद मेरे कमरे का दरवाज़ा नॉक हुआ और आवाज़ आई डाकिया डाक लाया .....बेटी ने मेरे हाथ में एन्वेलोप नुमा कुछ थमाया और बोली तुम्हारी चिट्ठी। मैं समझ गयी उसने पोस्टकार्ड लिखा है। मैं हँसने लगी ऐसे कोई एक रूम से दूसरे रूम में चिट्ठी लिखता है क्या ? अरे मम्मा चिट्ठी इम्पोर्टेन्ट है कहाँ से लिखी गयी है ये मत सोचो। चिट्ठी में आम बातें थीं। एड्रेस देखकर में अब तक हँस रही हूँ - किड्स रूम to मास्टर बेड रूम।

-नेहा

(नेहा एक अच्छी माँ और हाउस वाइफ हैं। साथ में स्वतंत्र लेखन का कार्य करती हैं।)

41 views1 comment

©2018 by Suno Mummy........