• Pritima Vats

जंगल में इंटरनेट

जंगल के सारे जीवों में एक अजीब सा उत्साह था। आज जंगल में इंटरनेट जो आया था। सारे जीव इसी बारे में बातें कर रहे थे। हालाँकि कौन से नए जानवर का नाम है इंटरनेट, यह किसी को पता नहीं था। फिर भी वे यह पता लगाने की कोशिश लगातार कर रहे थे कि यह नया जानवर खतरनाक तो नहीं है। अनेक सवाल थे उनके मन में।

‘कैसा दिखता होगा यह इंटरनेट’?

‘उसकी पूँछ होगी या नहीं’?

कोई कहता, ‘अरे नहीं भाई, यह जानवर का नाम नहीं है’।

‘तो फिर क्या है’?

‘यह एक चिड़िया का नाम है’?

‘ओह, अच्छा-अच्छा, चिड़िया होती है यह’।

इस तरह की बातें पूरे जंगल में हो रही थीं। “शाम को राजा शेर ने सभी जानवरों को अपनी गुफा के सामने बुलाया है। तब वे हमको इस इंटरनेट से मिलवाएँगे।” सभी एक दूसरे को बता रहे थे।

शाम को जब सभी जानवर,पक्षी वगैरह शेर की गुफा के सामने जमा हुए। तब राजा शेर एक अजीब सी चीज के साथ बाहर आए।

‘ये क्या है?’ फिर फुसफुसाहट होने लगी।

तब शेर ने कहा, ‘दोस्तो, यह है कंप्यूटर’l

‘कंप्यूटर? और एक जानवर?’सबने सोचा। ‘यह एक मशीन है और इंटरनेट का प्रयोग करने के लिए हमारे पास कंप्यूटर का होना बहुत जरूरी है।’ शेर ने कहा। सभी ध्यान से उसकी बातें सुन रहे थे।

‘इंटरनेट के माध्यम से हम दूर-दूर रहनेवाले अपने दोस्तों और संबंधियों से घर बैठे बात कर सकते हैं। उन्हें हम पत्र भी भेज सकते हैं। पत्र भेजने के इस तरीके को ई-मेल कहते हैं। यदि हम पत्र डाक विभाग के माध्यम से भेजते हैं तो उसे पहुँचने में दो-तीन दिन लगते हैं, लेकिन ई-मेल भेजने में बस कुछ सेकेंड ही लगते हैं और सबसे बढ़िया बात है कि इसमें खर्चा न के बराबर आता है।’ शेर समझा रहा था।

‘और क्या फायदे हैं इंटरनेट के?’ जानवरों ने उत्सुकता से पूछा।

‘बहुत से फायदे हैं। आप किसी भी समय दुनिया के दूसरे हिस्सों में होनेवाली घटनाओं के बारे में जान सकते हो। हर तरह की जानकारी इसमें है।’ शेर ने बताया।

‘वाह, ये तो कमाल की वस्तु है।’ सबने एक साथ कहा। लेकिन कोई था जो इस सबसे खुश नहीं था और वह था कबूतर, खबरी। इतने वर्षों से वही था, जो सारे समाचार और पत्र दूर-दूर के जंगलों तक पहुँचाता था। पर उसे लग रहा था कि अब उसकी कोई जरूरत नहीं थी। वह बहुत उदास था।

उसने शेर से इस बारे में बात की। शेर ने कहा, ‘देखो खबरी, तुमने सबकी बहुत सेवा की है। लेकिन जंगल की तरक्की के लिए कंप्यूटर को जंगल में लाना बहुत जरूरी था। तुम किसी और काम के बारे में सोचो।’

कबूतर उदास मन से अपने घर लौट आया। जंगल में धीरे-धीरे सभी ने कंप्यूटर सीखना शुरु कर दिया।

कई महीने ऐसे ही बीत गए। सब जानवर आजकल ई-मेल भेजने लगे था। इसीलिए खबरी के लिए ज्यादा काम नहीं होता था। बच्चे किताबों से ज्यादा इंटरनेट पर पढ़ाई चाहते थे। पूरा जंगल जैसे कंप्यूटर पर निर्भर हो गया था।

एक दिन बहुत तेज बारिश हुई। तेज हवा चली और बहुत सारे पेड़ टूट गए। उस गड़बड़ में जंगल के कंप्यूटरों का इंटरनेट से संबंध टूट गया। जंगल के जानवर न तो किसी को ई-मेल भेज पा रहे थे और न हीं उनके बच्चे ठीक से पढ़ाई कर पा रहे थे। जानवर अबतक इतने आलसी हो चुके थे कि पत्र लिखना उन्हें अच्छा ही नहीं लगता था।

तभी एक दुर्घटना हुई। हिरन का बच्चा दौड़ रहा था, वह क पेड़ से टकराया और उसके सिर पर गहरी चोट लगी। जंगल के डाक्टर साहब उल्लू जी किसी का इलाज करने दूसरे जंगल में गए हुए थे। समस्या थी कि उन्हें कैसे बुलाया जाए। इससे पहले तो उन्हें ई-मेल भेजकर संदेश दे दिया जाता था। लेकिन अभी तो सारी व्यवस्था टूटी हुई थी। हिरन के माता-पिता रोते हुए राजा शेर के पास पहुँचे। राजा भी असहाय था, करे तो क्या करे?

तब खबरी ने कहा, ‘मैं बुलाकर लाउँगा डाक्टर को। आखिर पहले भी ते मैं ही यह सब काम करता था।’

सबको बहुत तसल्ली हुई कि खबरी आज भी उनकी मदद करने को तैयार था।

तो खबरी उड़ा और कुछ ही देर बाद डाक्टर उल्लू जी वहाँ पहुँच गए। खबरी के कारण ही हिरन के बच्चे की जान बच गई।

अब खबरी कबूतर की बारी थी सबको समझाने की। वह बोला, ‘मैं मानता हूँ कि जंगल का विकास जरूरी है, लेकिन हमें अपने पुराने तरीकों को भूलना नहीं चाहिए। हम सभी टी0वी0 में समाचार सुनते हैं, लेकिन अखबार में समाचार पढ़ने का मजा ही कुछ और है।’ ऐसे ही कंप्यूटर का प्रयोग करें लेकिन हमें पूरी तरह से उसपर निर्भर नहीं होना चाहिए। क्योंकि मशीन तो मशीन ही होती है, क्यों ठीक कहा न मैंने?

जवाब में सबने सिर्फ ‘हाँ’ में सिर हिलाया। उन्हें अपनी गलती समझ में आ गई थी।

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