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जड़ी-बूटियों के फायदे (Benefits of herbs)

Updated: Oct 19


पर्यावरण में हमारे आस-पास ढेर सारे ऐसे पेड़-पौधे और जड़ी-बूटियाँ हैं जो निःशुल्क हमें मिल जाती हैं और जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हीं उपयोगी होती हैं। हम यहाँ पर कुछ ऐसे हीं पेड़-पौधों के बारे में बात करेंगे।

जड़ी-बूटियों की पहचान सामान्य तौर पर उसके नमकीन या सुगंधित गुणों के साथ ही होती है। यह भोजन को स्वादिष्ट बनाने और गार्निश करने के साथ-साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए भी उपयोगी होता है। जड़ी बूटी पौधों के पत्तेदार भाग हैं, वे सूखे या ताजा दोनों हीं रूपों में उपयोग हो सकते हैं। सूखे जड़ी बूटियों में ताजे की तुलना में ज्यादा स्वाद होता है।


1) तुलसी

यह पुदीना परिवार की जड़ी बूटी है। यह भोजन के स्वाद को बढ़ाता है और इसके पोषक तत्व स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं। आयुर्वेद की दृष्टि से तुलसी की दो किस्में हैं।

{1} मीठी तुलसी और {2} पवित्र तुलसी या तुलसी।

मीठी तुलसी विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करती है जबकि तुलसी या पवित्र तुलसी दक्षिण पूर्व एशिया और आयुर्वेदिक दवाओं में एक चिकित्सीय भूमिका निभाती है। तुलसी के पारंपरिक उपयोगों में सर्पदंश का उपचार भी शामिल है। कई अन्य स्वास्थ्य लाभ हैं:

* यह ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करता है।

* जिगर के लिए लाभदायक है।

* कैंसर से लड़ता है।

* त्वचा की उम्र बढ़ाने में मदद करता है।

* उच्च रक्तचाप को कम करता है।

2) अजवायन

यह भी तुलसी की तरह पुदीना परिवार से आता है। व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने और औषधि के रूप में इसका उपयोग हजारों वर्षों से किया जाता है। लोग भोजन में अजवायन को सप्लीमेंट और सुगंधित बनाने में उपयोग करते हैं। इसके तेल का भी उपयोग किया जाता है। भूमध्यसागरीय क्षेत्र के लोगों ने हर्बल दवाओं के रूप में सदियों से अजवायन का उपयोग किया है। इसका इस्तेमाल कई तरह की बिमारियों के इलाज में कर सकते हैं:

अस्थमा, ऐंठन, अतिसार, अपच, जुकाम,कैंसर से लड़ने में, ब्लड शुगर और लिपिड को नियंत्रित करने में, टाइप 2 डायबिटीज को नियंत्रित करने में, खांसी रोकने में, एलर्जी, सिरदर्द,उच्च कोलेस्ट्रॉल को कम करने में, मुँहासे, रूसी, घाव, कीटनाशक और कीट से बचाने वाली क्रीम के रूप में भी इसका इस्तेमाल होता है।

3) तेजपत्ता

तेजपत्ते का आमतौर पर खाना पकाने में उपयोग किया जानेवाला सुगंधित पत्ता है, आयुर्वेद में इस पत्ते को साबुत रूप में उपयोग की सलाह दी जाती है। कहीं-कहीं इसके पाउडर का भी उपयोग किया जाता है, लेकिन आयुर्वेद के हिसाब से यह हानिकारक भी हो सकता है। हमारे स्वास्थ के लिए यह बहुत उपयोगी हैः

· यह कैंसर से लड़ने में मदद करता है।

· प्रतिदिन 1-3 ग्राम तेजपत्ता मधुमेह के रोगियों को में ग्लूकोज और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रबंधित करने में मदद कर सकती है।

· घावों का इलाज में उपयोगी है।

· गुर्दे की पथरी का इलाज कर सकते हैं।

· मस्तिष्क विकार का इलाज कर सकता है।

4) थाइम

यह चिकित्सा, आहार और सजावटी उपयोगों के साथ भूमध्य जड़ी-बूटी है। लोगों को मौत से बचाने के लिए पुराने जमाने में भी थाइम का इस्तेमाल किया जाता था। थाइम का उपयोग ताजा, सूखे जड़ी बूटियों और तेल के रूप में किया जा सकता हैं। यह बाघ-मच्छरों को मारने में, उच्च रक्तचाप के इलाज में, भोजन से होनेवाले संक्रमित जीवाणु से लड़ने में, स्तन कैंसर से लड़ने में, त्वचा की सामान्य समस्या में काफी उपयोगी होता है।

-नीलेश कश्यप

( फोटोग्राफ- नेट से साभार)

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