• Pritima Vats

चीजें बिखरी रहने दो (Let things be scattered)

-नेहा

बच्चों का पसंदीदा काम शायद घर में चीजें फैलाना है। रोज़ कितने भी नियम बन जाए घर को साफ़ रखने के लिए लेकिन होना वही है जो बच्चे चाहेंगे। मैं किचन से निकली तो देखा पूरे फ़र्श पर टॉयज और colours बिछे पड़े हैं कालीन की तरह। अरे बाप रे! ये इतने सारे colours,टॉयज इधर-उधर क्या कर रहे हैं। जगह पर रख दो प्लीज। सोफे पर पड़े–पड़े मेरे तीन साल के बेटे ने जवाब दिया, “मम्मा मेरे colours को कोई काम नही है क्या? वो भी काम की वजह से इधर–उधर घूमते हैं।” अब मैं हैरान की ये नया फितूर क्या है,बेटे से पूछा, कलर्स खुद से कैसे घूम सकते हैं। ये सब तो नॉन–लिविंग थिंग है। इनमें जान नही है। क्या तुम्हारे टॉयज तुमसे बातें करते हैं? उसने बड़ी सहजता से जबाव दिया, तुम भी ना मम्मा .....कुछ भी कहती हो.....टॉयज मुझसे क्यों बात करेंगे? इन्सान-इन्सान से बातें करते हैं और toy toy से। मूवीज में नही देखती टॉयज बातें करते हैं,एलियन बातें करते हैं। तुम कुछ भी नही जानती मम्मा। मैंने कहा,बात को मत घुमाओ अब साफ़–साफ़ बताओ चीजों को जगह पर रखोगे या नही। बेटे का जवाब था, “मम्मा क्या पता उन्हें कुछ इम्पोर्टेन्ट काम को या इम्पोर्टेन्ट बातचीत चल रही हो मैं अपनी चीजों की डिस्टर्ब नही करना चाहता हूँ। तुम्ही ने कहा है न किसी को डिस्टर्ब करना बुरी बात है।” चीजों को घर में बिखराने से घर गन्दा दिखता है बेटा फिर सभी कहेंगे ‘आरव’ का घर कितना गन्दा है। प्रशन थम नही रहा था, “मम्मा सभी कौन हम चार ही तो हैं। अभी तो कोई आता भी नही।”ओह ओ! हमें अपने लिए घर साफ़ रखना चाहिए। वो गांधी बापू ने भी कहा है हमे साफ़-सुथरा रहना चाहिए। आश्चर्य से बेटे ने कहा , “अच्छा! पैसे वाले बापू ने ?” मैंने हाँ में सर हिलाया। कब कहा तुम्हे बापू ने? अरे ! सिर्फ मुझे ही नही पूरे देश से कहा है। चेहरे पर सोचने वाला भाव लेकर कहता है, “किसी ने तो पर बात नही मानी।” तुम्हे कैसे पता किसी ने बात नही मानी। अब शुरू हुई कहानी, “अरे जब हम बिहार जाने के लिए एअरपोर्ट जा रहे थे ना तो रेड लाइट पर रुके तब एक बाइक वाले अंकल ने बड़ा सा ....मोटा सा ...ब्राउन कवर सड़क किनारे फ़ेंक दिया और तुम मुझे छोटा सा चॉकलेट का रैपर भी नही फेंकने देती।” उस अंकल ने गलत किया पर हमें ग़लती नही करनी चाहिए। मम्मा तुम भूल गयी एक बार तुमने कार में मेरा लिक्क किया रैपर अपने बैग में रखकर भूल गयी थी और cubboard में बैग रख दिया था (ज़ोर से हँसते हुए) तुम्हारे पूरे बैग में चींटी लग गयी थी और कपड़ो पर भी। उसकी हँसी रुक नहीं रही थी। मुझे भी हँसी आ रही थी। मैंने अपनी सफाई मैं कहा, “मैं घर आकर उसे dustbin में डालना भूल गयी थी, मेरे पास सौ काम रहते हैं।” उसने हँसते हुए कहा, ‘भुलक्कड़ मम्मा!’ मैंने भी उसके गाल पर हल्की सी थपकी देकर कहा, ‘बातूनी बच्चा!’ बातूनी क्या होता है? जो ज़्यादा बात करे उसे बातूनी कहते हैं। बड़े ही नाटकीय अंदाज़ में उसने कहा, ‘लो अब मैं बातें भी ना करूँ। टीवी मत देखो ,चिप्स मत खाओ ,ज़्यादा नहाना नही ,ज़्यादा लीची मत खाओ अब बात भी ना करूँ। तो मैं क्या करूँ?’ मैंने समझाते हुए उसे कहा की जब तुम बड़े हो जाओगे तब तुम्हें पता चलेगा ये सब मैं तुम्हारे भले के लिए ही कह रही हूँ। उसने मेरा समझाना ख़ारिज करते हुए कहा, “मम्मा मुझे बड़ा नही होना। बड़े होने पर मुझे दीदी की तरह बहुत देर तक स्कूल जाना पड़ेगा और मुझे स्कूल नहीं जाना, मुझे सब्जी बेचने वाला बनना है।” लो अब ये नया आईडिया छोटे से दिमाग में कहाँ से आया। कब से ये आईडिया चल रहा है तुम्हारे शैतानी दिमाग में। तपाक से जवाब मिला, “जब से कोरोना आया है तब से इस आईडिया पर मैं काम कर रहा हूँ। तुम एक दिन डैड से कह रही थी ना बड़ी मुश्किल हो गयी है सब्जी नही मिल रही है क्या खाना बनाउँगी। फिर कुछ सब्जी वाले आने लगे तो तुम्हारी मुश्किल दूर हो गयी। तुम्हारी मदद की ना सब्जी वाले ने बोलो?” मैंने हामी भरी। “किसी की मदद करना इम्पोर्टेन्ट काम होता है मम्मा, तुम्ही ने बोला है तो मैं बड़े होकर सभी की मदद करूँगा।”

मेरा सर थोडा चकरा रहा था। खुद को ही बोल रही थी ग्रो पेशेंस ग्रो पेशेंस। मैं उठकर सारी बिखरी चीजें समेटने लगी तो पीछे से आकर कहता है चलो तुम्हारी मदद कर देता हूँ। तुम्हारा back pain है ना ! मैंने कहा बड़ी जल्दी याद आ गया तुम्हे। मम्मू कहकर लिपट गया मुझसे और ढेर सारी पप्पियों की बौछार होने लगी।

............................

-नेहा

©2018 by Suno Mummy........