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गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक है जीका वायरस


पोलियोमुक्त हो चुके भारत में जीका वायरस के वीषाणुओं का मिलना किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। यूँ तो यह वायरस किसी पर भी अटैक कर सकता है। पर गर्भवती महिलाओं और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को इससे ज्यादा नुकसान पहुँचता है। इंडियन मेडिकल असोसिएशन के पूर्व प्रेजिडेंट डॉक्टर के. के. अग्रवाल ने बताया कि अगर प्रेग्नेंट महिलाओं में डेंगू के लक्षण वाले फीवर हैं, तो उनका जीका का टेस्ट जरूर कराना चाहिए। यह वायरस सबसे ज्यादा प्रेग्नेंट महिलाओं और उनके गर्भ में पल रहे बच्चों पर अटैक करता है। डॉक्टर का कहना है कि जीका वायरस से भले ही मौतें कम होती हैं, लेकिन अगर गर्भवती महिलाओं में इस वायरस का अटैक हो जाता है तो यह बच्चे में न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का खतरा पैदा करता है। जो ब्रेन डेवेलपमेंट पर असर पड़ता है।

जीका वायरस के लक्षण

जीका वायरस के लक्षण आसानी से नहीं दिखते हैं। इस बीमारी से संक्रमित हर पांच में से एक व्यक्ति में ही इसके लक्षण दिखते हैं। वायरस के शिकार लोगों में जोड़ों का दर्द, आंखें लाल होना, उल्टी आना, बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके शिकार कुछ ही मरीजों को एडमिट करने की नौबत आती है। जीका वायरस के मरीज को पूरी तरह से आराम करना चाहिए।

जीका वायरस से ऐसे बचें

* घर में मच्छर न पनपने दें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली जरूर लगाना चाहिए, जालीवाले दरवाजे हमेशा बंद रखना चाहिए।

* जो महिलाएँ लंबी यात्रा से लौटी हैं खासतौर से उन जगहों से जहाँ वाइरस फैला हुआ है, तो अगले 8 सप्ताह तक एहतियात के तौर पर उन्हें गर्भधारण करने से बचना चाहिए।

* अगर आपको डायबीटीज, हाइपरटेंशन, इम्युनिटी डिसऑर्डर जैसी दिक्कतें हैं तो जीका वायरस से प्रभावित इलाकों की यात्रा करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। और यदि यात्रा से आने के दो सप्ताह के अंदर अगर आपको हल्का बुखार होता है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

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