• Pritima Vats

कैसे करें अपने बच्चों को अनुशासित

अपने बच्चों को सही भविष्य देने के लिए हमें खुद अपनी जीवन शैली को अनुशासित करना पड़ता है। उसके बाद छोटी उम्र से ही उन्हें कुछ अच्छी आदतें सिखाकर हम उसे एक अच्छे भविष्य की ओर अग्रसर कर सकते हैं। यह उनके लिए और आपके लिए दोनों के लिए बेहतर होता है। क्योंकि यदि आप अपने बच्चों को बच्चा बच्चा कहकर उसकी गलत आदतों को भी नज़रअंदाज़ कर देते हैं तो इसका उस पर गलत असर पड़ता है। इसीलिए बच्चा जब चलने लगता है, बोलने लगता है, या चीजों को छेड़ने लगता है तभी से बच्चों में अनुशासन की शुरुआत कर देनी चाहिए। ताकि धीरे धीरे उन्हें समझ आने लग जाए की क्या उनके लिए सही है और क्या उनके लिए गलत है।

बच्चे के लिए उनके पहले दोस्त भी माँ बाप होते है, और पहले गुरु भी माँ बाप होते हैं। ऐसे में आपको धैर्य और प्यार दोनों का संगम करके बच्चे में अनुशासन लाना चाहिए। अनुशासन का मतलब रोक लगाना या गुस्सा करना नहीं होता है। बल्कि अनुशासन का मतलब प्यार और धैर्य के साथ बच्चे को गलत और सही की समझ देना होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की किस तरह आप अपने बच्चों को अनुशासन सीखा सकते हैं।

प्यार से समझाएँ-

अनुशासन सिखाने का यह मतलब नहीं होता है की आप बच्चों पर रोक लगाएँ या हमेशा गुस्से में ही उनसे बात करें। बल्कि यदि आप चाहते है की बच्चे को कोई भी बात समझ आए तो उसे समझाने के लिए बेहतर तरीके का इस्तेमाल करें और बात करते हुए प्यार से पेश आएँ। क्योंकि बच्चा वही सीखेगा जो आप उसे सिखाएँगे ऐसे में आप उन्हें अनुशासन क्या होता है और क्या सही और क्या गलत है यह बताएँ लेकिन प्यार से। और साथ ही उन्हें यह भी बताएँ की आप उनसे कितना प्यार करते हैं ताकि वो आपकी हर बात को प्यार से सुने और समझें।

गलतियों को इग्नोर न करें-

कुछ माँ बाप बच्चे के गलती होने पर उसे नटखट या शरारती कहकर उसकी गलतियों को इग्नोर करते है। जो की बच्चे को गलत शिक्षा देता है ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। यदि बच्चा जहाँ गलती करता है उसे वहीं समझाना चाहिए की वो गलत है। ऐसा करने से बच्चा धीरे-धीरे खुद हीं समझ जाता है कि क्या उसके लिए सही है और क्या गलत। यदि हम उसकी गलतियों को इग्नोर करते हैं तो बाद में उसे समझाना मुश्किल हो सकता है।

माता-पिता एकमत रहें-

बच्चे को अनुशासन सिखाने के लिए माँ-बाप को इस बात का खास ध्यान देना चाहिए की वो एकमत रहें। क्योंकि यदि माँ-बाप की सोच नहीं मिलती है तो इसका बच्चे पर नकारात्मक असर पड़ता है। यदि हम बच्चे की किसी गलती पर उसे उसे बचाने की कोशिश करते है तो उसे पता चल जाता है कि उसके गलत करने पर भी उसे कोई बचा लेगा, जो की बच्चे को अनुशासनहीन बनाने का सबसे बड़ा कारण होता है। इसीलिए बच्चे को अनुशासन सिखाने के लिए माँ-बाप दोनों को हमेशा एकमत रहना चाहिए।

कुछ नियमों का पालन करना-

बच्चों में अनुशासन लाने के लिए नियम बनाने बहुत जरुरी होते हैं इससे न केवल उनकी दिनचर्या सही होती है। बल्कि इससे धीरे-धीरे बच्चों को खुद अपने काम को समय पर करने की आदत पड़ जाती है। ऐसा नियम बड़े बच्चों पर ही नहीं छोटे बच्चों पर भी लगाना चाहिए ताकि शुरू से ही उन्हें सीमा में रहने की आदत हो जाए।

पिटाई से बचें-

कुछ माँ-बाप ऐसा सोचते हैं की बच्चे को मारकर या उनसे ऊँची आवाज़ में बात करके वो अपने बच्चे में अनुशासन ला सकते हैं। जो की गलत सोच होती है क्योंकि यदि आप बच्चे को मारते हैं तो उसे मार की आदत हो जाती है जिससे बच्चा जिद्दी, गुस्से वाला बनता है, जो की बाद में बढ़ता जाता है। ऐसे में जरुरी है की बच्चे को कुछ अच्छा सिखाने के लिए आप धैर्य और प्यार से काम लें।

बच्चों के मनोरंजन का भी रखें ध्यान-

बच्चों को अनुशासन सिखाने के साथ आपको बच्चे के मनोरंजन और खेलकूद का भी ध्यान रखना चाहिए, जैसे की बच्चे को गेम खिलाएँ, उन्हें कहीं बाहर लेकर जाएँ, जिससे उनका मूड फ्रैश हो सके। ऐसा करने से आप अपने बच्चे की देख रेख कर सकती है, उनके अच्छे दोस्त बन सकते हैं, जिससे आप उन्हें आसानी से सही और गलत के बारे में बता सकते हैं।

गलतियों से सीख लेना सिखाएँ-

यदि आपका बच्चा कोई भी गलती करता है तो ऐसे में आपको बच्चे को डाँटने, मारने या सजा देने की बजाय उसे गलतियों से सीख लेने के लिए कहना चाहिए। यदि आपका बच्चा कोई गलती करता है तो उसे धैर्य के साथ हमें बताना चाहिए कि उसका क्या परिणाम हो सकता है। जिससे बच्चे को अपनी गलती का अहसास होगा और वह भविष्य में उन गलतियों को करने से बचेगा।


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