• Pritima Vats

कहीं आपका बच्चा मोटा तो नहीं....


आधुनिकता नें एक ओर जहाँ हमें बहुत सारी सहूलियतें दी हैं, हमारा काफी सारा काम आसान कर दिया है। वहीं इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हैं। इसी का एक उदाहरण है आज हमें और हमारे बच्चों को जो खाने का मन होता है वह हम तुरत बाजार से मंगवाकर दे सकते हैं। एक फोन किया और जायकेदार खाना हाजिर हो जाता है। कामकाजी महिलाओं के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं लगता है। जब हम दिनभर ऑफिस से थककर घर आते हैं तो किचन में जाने का मन तो कतई नहीं करता है। लेकिन यदि हम रोज-रोज यही खाना खाएँ तो हमारे सेहत पर बहुत गलत असर डालता है। छोटे-छोटे बच्चों में मोटापे की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। यह सिर्फ हमारे देश में ही नहीं पूरे विश्व की समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आधार पर पूरी दुनिया में 5 साल से कम उम्र के 2 करोड़ 22 लाख से भी अधिक बच्चे ओवरवेट हैं। बच्चों में मोटापे के कई कारण सामने आ रहे हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार है-

1.विशेषज्ञों की मानें तो छोटे बच्चों में मोटापा होने का एक कारण है गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर में विटामिन डी की कमी । ये भी संभव है कि माता-पिता के ओवरवेट होने के कारण बच्चा भी आगे जाकर मोटापे का शिकार हो जाए ।

2.जंक फूड और तैलीय चीजों की तरफ बढ़ता रूझान।

3.आउटडोर गेम और इनडोर गेम से बढ़ती दूरी। बच्चे ज्यादातर समय अपने मोबाइल या लेपटॉप पर गेम खेलना पसंद करते हैं।

4.कामकाजी महिलाएं अपने बच्चों की दिनचर्या पर उतना समय दे नहीं पाती हैं जितना उन्हें देना चाहिए।


हमारी थोड़ी सी समझदारी और मेहनत हमारे बच्चो के स्वास्थ को सही कर सकती हैं, उन्हें भविष्य में मोटापे के साथ साथ बहुत सारी बिमारियों जैसे- डायबीटिज, ब्लडप्रेशर, हृदयरोग आदि से बचा सकती हैं।

1.अपने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा घर की बनी हुई चीजों को खाने की आदत डालें। अधिकांश लोग झटपट तैयार होने वाला भोजन ही चुनते हैं। ये जानते हुए भी कि 2 मिनट में तैयार होने वाली सामग्री सेहतमंद नहीं है।

2.गर्भावस्था के दौरान ही माँ को धूप सेकनी चाहिए और शिशु को कम से कम 6 माह तक स्तनपान अवश्य कराना चाहिए ।

3.गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार लेना आवश्यक होता है ताकि भविष्य में भी शिशु का स्वास्थ्य व शरीर ठीक रह सके ।

4.छोटी उम्र से ही बच्चे को सक्रिय रखना चाहिए। आजकल खेलने के कम जगहों के कारण बच्चों की शारीरिक गतिविधियाँ जिस तरह से कम होती जा रही हैं वह भी बच्चों में मोटापे का कारण बन रही है।

5.सॉफ्ट ड्रिंक हमेशा न पीने दें। इसकी बजाए खूब पानी,घर का बना हुआ जूस या नींबू पानी सिकंजी आदि पीना सिखाएँ।

6.रोज सुबह का नाश्ता बच्चे को ज़रुर खिलाएँ इससे लंच टाईम में उन्हें कम खाने की इच्छा रहती है और वो अनावश्यक रुप से कैलोरी नहीं जमा कर पाते ।

7.तली-भूनी चीजों की बजाय अपने बच्चों को हरी सब्जियाँ, दूध और दूध से बने समान, फल,सलाद आदि खाना शुरुआत से ही सिखाएँ।

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