• Pritima Vats

उम्मीदों को दें नया पंख

Updated: Sep 20, 2018

दुनिया का हर बच्चा होनहार होता है। हर माता-पिता अपने बच्चे को कामयाब इन्सान बनाने का सपना देखते हैं। लेकिन आभाव रहता है तो सिर्फ उसके क्षेत्र के सही चुनाव और दिशा-निर्देशन का। यदि हम अपनी महत्वाकांक्षा को छोड़कर बच्चों को उसके हिसाब से रास्ता चुनने की आजादी दें तो ये बच्चे भी किसी से कम नहीं साबित होंगे।

बच्चे अपनी कल्पना से कई तरह के खेल खेलते रहते है। कुछ बच्चे खिलौनों में दिमाग लगाते हैं, कुछ घर के सामानों से तरह-तरह के करतब करते हैं तो कुछ बच्चों को पेंटिंग का बड़ा शौक होता है। वे मौका मिलते ही अपनी मम्मी के लिपिस्टिक,काजल, बिंदी वगैरह से चित्रकारी कर डालते हैं। जगह चाहे घर की दीवार हो या फर्श उन्हें ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। ऐसे में हमें उसे डाटने के बजाय प्यार से समझाना चाहिए। उसकी कल्पनाशीलता को सही दिशा में प्रेरित करना चाहिए। सोनाली की माँ को भी तब बहुत गुस्सा आया था जब दो वर्षीया सोनाली ने उनकी लिपिस्टीक से पूरे फर्श पर रंगोली बना दी थी, लेकिन सोनाली की माँ ने गुस्सा करने के बजाय उसे प्यार से समझाया तथा स्क्रैपबुक और कॉपी खरीदकर दिया। आज सोनाली कक्षा दो की छात्रा है और अपने क्लास में सबसे अच्छी पेंटिंग बनाती है। बच्चों में सही और सकारात्मक सोच ही उसे स्कूल तथा उससे आगे की जिन्दगी के सफर में मदद करता है।

हर वक्त बच्चों पर टोका-टोकी करने की बजाय उसे सृजनात्मक चीजों से रूबरू कराना चाहिए। अपने बचपन के दिनों को यादकर भी हम अपने बच्चों को बहुत कुछ सिखा सकते हैं। हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बचपन में जो बातें हमें परेशान करती थी बह हमारे बच्चों को भी उतना हीं परेशान करेंगी। हमनें कौन सा काम सामान या सहयोग के आभाव में नहीं किया। वह कमी हम अपने बच्चों में यथासंभव नहीं होने दें। अपनी नन्ही जान को हम जिन्दगी की राह पर चलने का बहुत ही महत्वपूर्ण नुस्खा देते हैं। यह नुस्खा जितना मजबूत होगा, बच्चे का भविष्य भी उतना ही उज्जवल होगा।

नये नये आइडिया देः

बच्चे अपना काम अपनी सोच के हिसाब से ही करता है। हमें उसकी सोच को प्यार से नये-नये मोड़ देने चाहिए। जिससे वह अपने काम को और बेहतर ढंग से कर सके। छह वर्षीय चीनू को टीवी देखना बहुत अच्छा लगता है, उसकी मम्मी ने उसके इस काम में भी सृजनात्मकता ढूंढ निकली। उसे उसके मनपसंद शो के किसी एपीसोड की कहानी को अपनी भाषा में लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। नतीजा सामने था, चीनू ने इतनी अच्छी तरह से एक कहानी तैयार कर दिया कि सभी उसके इस काम पर हैरान रह गए। हम बच्चों को किसी मनपसंद कहानी का अन्त नये अंदाज में लिखने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।

क्राफ्ट बनानाः

क्राफ्ट बनाना बच्चों को बड़ा भाता है। यह बच्चों की सृजनशीलता को निखारने का एक बड़ा ही आसान और दिलचस्प तरीका है। इस माध्यम से बच्चे तरह-तरह के खिलौने,कार्टुन कैरेक्टर, पपेट वगैरह बनाना सीखते हैं। सिर्फ अच्छा आइडिया ही काफी नहीं है, उन्हें इसे धरातल पर लाने के लिए उपयुक्त सामान भी उपलब्ध कराएँ। जैसे-स्क्रैपबुक,पावर बॉल, कैन्डी, गुड़िया, थर्मोकॉल, सितारे, फेविकोल, अन्य सजावट के सामान कलर आदि। चटख रंग भी बच्चों को बहुत आकर्षित करते हैं। उन्हें कभी भी बाजार में मिलनेवाला घटिया क्रेयॉन्स या कलर नहीं देना चाहिए। अच्छी कम्पनी का स्मूथ और चटख कलर बच्चे बड़े चाव से उपयोग में लाते हैं। जहाँ सस्ते कलर से वे बिदक जाते हैं और धीरे-धीरे रंगों से उनका मन हटता चला जाता है।

उन्हें आजादी देः

कभी-कभी बच्चों को उसके मन के हिसाब से छोड़ दें। बच्चे आपकी सीख में अपनी कल्पनाशीलता को मिलाकर कुछ नया करने की कोशिश करते हैं। कई बार यह कोशिश नाकाम भी हो जाती है। लेकिन ऐसे मौके कम ही आते हैं। नीता अक्सर अपनी तीन वर्षीया बेटी उषा के साथ ऐसा ही किया करती है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास मजबूत होता है। उनमें खुद कुछ अच्छा करने की सोच उत्पन्न होती है।

कई बार बच्चे बार-बार समझाने पर भी बात को नहीं समझते हैं। ऐसे समय में उन्हें कुछ ससक्त उदाहरण प्रस्तुत करने चाहिए। कोई ऐसी कहानी बनाकर सुनानी चाहिए जो कि उसके कोमल मन पर अपना प्रभाव छोड़े। उन्हें सही और गलत में फर्क करना सिखाएँ। दुनिया का हर बच्चा होनहार होता है। और हर माता-पिता अपने बच्चे को कामयाब इन्सान बनाने का सपना देखते हैं। लेकिन सही दिशा निर्देशन के आभाव में कई बार हमारा सपना साकार नहीं हो पाता है।


-प्रीतिमा वत्स


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