• Pritima Vats

अच्छी मम्मी, अच्छे बच्चे


बच्चों की परवरिश बहुत आसान नहीं। खासकर तब, जब आप अपने बच्चे के लिए खुद सपने देखने शुरु करती हैं। ऐसे में पापा की तुलना में मम्मी की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, क्योंकि मम्मी बच्चों के साथ ज्यादा वक्त बिताती हैं। अच्छी माम्मी बनने के लिए आपको भी कुछ बदलना होगा, तभी आपके बच्चे अच्छे बनेंगे। अच्छी मम्मी बनने के लिए कुछ अच्छी बातें-

1. बच्चे के मनोभावों को पढ़ना सीखें- क्या अच्छा है और क्या है बुरा, ये फर्क करना बच्चों के लिए संभव नहीं। जो प्यार से बातें कर ले, बच्चे उनकी बात पर भरोसा कर लेते हैं। ऐसे में मम्मी होने के नाते आपको तय करना होगा कि बच्चे किनके साथ खेलें या बाहर जाएं। कई बातें बच्चे बताने में सक्षम नहीं होते। आप मम्मी हैं, उनके मनोभावों को पढ़ना सीखें।

2. बच्चों के टीचर से बात करें-चाहे वह स्कूल के टीचर हों, या होम ट्यूशन देने वाले टीचर। उनसे बातें जरूर करें। किस विषय में आपका बच्चा कमजोर है और किस विषय में बहुत आगे, इसकी जानकारी जरूर रखें। बच्चे की गलती पर कभी भी टीचर को दोषी ना ठहराएं।

3. बच्चे को दोस्त बनाने दें- अपनी उम्र के साथियों से बच्चे को घुलने मिलने दें। हो सकता है आपके बच्चे के बहुत ज्यादा दोस्त हों और आपको लगता हो कि वह पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा है तो उसे डांटे नहीं। उसे उनसे अलग ना करें। बच्चे को पढाई के साथ साथ सामाजिक गतिविधियों में भी हिस्सा लेने दें। किसी भी मंच पर बोलने का मौका हो तो जरूर भेजें।

4. आत्मनिर्भर बनाएं-किताबों को सहेजने, होमवर्क करने और पास के दुकान से स्टेशनरी खरीदने जैसे काम उसे खुद करने दें। बेशक आप साथ रहें। लेकिन दुकानदार से हिसाब उसे ही करने दें। बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ेगा। बच्चे पर जितना ज्यादा बंदिश होगा, बच्चा उतना पीछे रह जाएगा।

5. जो करने कहें, खुद भी करें- अगर आप अपने बच्चे को पढ़ने के लिए कहती हैं तो खुद टीवी देखने या व्हाट्सऐप पर चैटिंग करने न बैठ जाएं, कम से कम बच्चे के सामने तो कतई नहीं। यह गलत है। आपका बच्चा जब पढ़ रहा है तो कोशिश करें कि आप भी न्यूजपेपर, मैगजीन या कोई किताब लेकर पास ही बैठें।

6. न झूठ बोलें, न खामियां निकालें- कोशिश करें कि बच्चे को सामने आपसे कोई झूठ न निकल जाए।इसका उसके दिमाग पर गलत असर पड़ सकता है। वह आपके सामने झूठ बोल सकता है या बोल सकती है। जाने-अनजाने हम बच्चों की उपस्थिति में ही उनकी खामियों पर चर्चा करने लगते हैं। इससे बचें। उनका मनोबल बढ़ाने पर जोर दें।

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